Monday, June 23, 2008

अंगूर खट्टे हैं-4

लोमडी की आँखें ... या निहार की आँखें....... ... आँखें जो बिन कहे सब कुछ कह जायें....... आँखे जिसने कभी भी निहारिका से झूठ नही बोला........ निहार की ही हो सकती हैं ये आँखें ........... और इन आंखों ने देखते देखते उसे माज़ी (अतीत) के हवाले कर दिया... याद आ गया वो दिन जब वह निहार से मिली थी....... .उस दिन काल सेंटर जाने का मन बिल्कुल ही नही था। मगर जाना ही पडा... सुबह घर पहुचते ही अनिकेत का कॉल ... लडाई... फिर पुरे दिन सो भी नही सकी ... शाम को ओफ्फिस ॥ वही रोज की कहानी .... सर दर्द से फटा जा रहा था ... काम छोड़ .... बहार निकल गई, कॉरिडोर तो पुरा सिगरेट के धुएं से भरा था .. 'पता नही लोग सिगरेट पिने आते हैं या काम करने ' ........... कैंटीन में जा कर बैठ गई.. अपने और अनिकेत के रिश्ते के बारे में सोचने लगी ... न जाने किस की नज़र लग गई थी....वह ग़लत नही थी.. अनिकेत भी ग़लत नही था अगर उसकी माने तो.. फिर ग़लत कौन था...और ग़लत क्या था.. ..अब उन्हें एक दुसरे की उन्ही आदतों से चिड होने लगी थी जिन पर कभी मर मिटते थे.. आज-कल उसे कोई भी वज़ह नही नज़र नही आ रही थी जिसकी वजह से दोनों साथ रहें .. फिर भी साथ क्यो हैं? .. एक आदत एक दुसरे के साथ की.. या कुछ और.. अगर यह आदत है तो फिर एक दूसरे की आदतों से ही परेशानी क्यो है..? स्कूल के दिन याद आ रहे थे .. कितने अच्छे थे.. कम से कम future , career ... इनका टेंशन तो नही होता था... या इन बातों को ले कर कभी भी लडाई तो नही होती थी.. स्कूल जाते वक्त नुक्कड़ पर बजाते गाने याद आ रहे थे.. .. रोज सुबह की वह बेकरारी की आज कौन सा गाना बजाय जाएगा उसके लिए.. सुबह अनिकेत ना जाने कब से खड़ा रहता था वहां अपनी साइकिल ले.. शायद ही कभी हुआ जब उसे वहां नही पाया हो.. कितना अजीब लगता था जब उसे नही देखती थी वहां ... वह पहली बारिश.. जब सावन बरसे तरसे दिल .... बजाय गया था... कितना भीगे थे वो दोनों उस बरसात में.... आज भी बारिश हुई थी ......और आज भी भीगी थी ......आसूओं के सैलाब में.......

5 comments:

anupam said...

At last Aapne himmat jutayi ise pendown karne ki.Simultaniously start preparing the screenplay also. Coz u know.... Ultimately we have to capture it in our Camera also.

pawanchandan said...

आंसुओं की बात कयों करते हो
हंसी खंशी की बातें क्‍या कम पड़ रही हैं
ब्‍लोगल वार्मिंग में आपका स्‍वागत है

Amit K. Sagar said...

रोचक. लिखते रहिये. शुभकामनायें.
---
उल्टा तीर

Raji Chandrasekhar said...

स्वागत है, आप का ।
मैं मलयलम का एक ब्लोगर, थोड़ा थोड़ा हिन्दी में भी ।

Anonymous said...

:)