Sunday, December 30, 2012

गणित



बहुत शातिर है,
चाल बड़ी तेज़ है उसकी....
कितनी भी कोशिश कर लूँ....
उसके कदमों से कदम नहीं मिला पता हूँ...
वह आगे निकाल जाता है, छोड़ के सब कुछ पीछे...
लिखावट महीन है उसकी...
सबके समझ में नहीं आती....
गणित बहुत अच्छा है,
कुछ भी नहीं भूलता, सब याद रखता है,
हर साल मेरे कर्मों का हिसाब
मेरे चेहरे पर दर्ज़ कर, गुजर जाता है वक़्त

Friday, December 21, 2012

मर्द



थोड़ी लज्जित हैं यह आँखें,
कुछ बोझ सा होता है पलकों पर!
झुकी-2 सी , दबी -2 सी रहती हैं,
बोझिल पलकें मेरी!
नज़रें नहीं मिला पता हूँ किसी महिला की नज़रों से.....
दिल में चोर सा बैठा है एक मर्द
जो शर्मिंदा है.... लज्जित है....
अपने मर्द होने पर!!!!!!!