शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

मर्द



थोड़ी लज्जित हैं यह आँखें,
कुछ बोझ सा होता है पलकों पर!
झुकी-2 सी , दबी -2 सी रहती हैं,
बोझिल पलकें मेरी!
नज़रें नहीं मिला पता हूँ किसी महिला की नज़रों से.....
दिल में चोर सा बैठा है एक मर्द
जो शर्मिंदा है.... लज्जित है....
अपने मर्द होने पर!!!!!!!

6 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

संवेदनशील रचना

rahul ranjan rai ने कहा…

protsahan ke liye bahut bahut dhanyvad sangeeta ji!

expression ने कहा…

बेहद सशक्त ,सहज और ह्रदय से लिखी रचना...

अनु

rahul ranjan rai ने कहा…

Dhanyavad Anu ji,

utsahvardhan aur blog par aane ke lye abhar

Neetu Sharma ने कहा…

Bahot acha likhte hai aap

rahul ranjan rai ने कहा…

Dhanyavad Neetu Sharma ji!