Friday, October 1, 2010

चलते -फिरते

१) शाम की लालिमा ओढ़े विशाल व्योम को देखा,
रात को जलते बुझते जुगनू से कुछ  सपने,
अब आसमान छोटा  और सपने बड़े लगते हैं मुझे! 

२) उसकी आवाज़ वादी में गूंजती रहती है,

कहते हैं वो बहुत सुरीला था कभी,
पर लोग अब उसे कश्मीर कहते हैं...







३) वो आग जैसी थी, सूरज सी गर्म  

उसके एक  इशारे पर हवाएं अपना रुख बदल लेती थी,
सुना है कल अपन घर जला बैठी है वो....





४) बहुत ऊँचा उड़ाती थी वो,

आसमान में सुराख़ कर आई,
सुना है उस सुराख़ से खून टपकात है उसका....