Friday, July 2, 2010

व्यथा

न थकन, न चुभन
न शोक, न आह्लाद,
बस चिंतन-मनन कर रहा हूँ.

न विघटन, न विखंडन,
न प्रतिकार,न चित्कार,
बस भावनाओं का दमन कर रहा हूँ.

न शिशिर,न बसंत,
न शीत. न हेमंत,
बस नम आँखों से नमन कर रहा हूँ.

न संशय, न विस्मय
न चिंगारी, न अंगारे
बस दिवा-स्वप्नों का दहन कर रहा हूँ.

न आग, न धुँआ
न कथ, न अकथ
बस मन के उन्मादों का हवन कर रहा हूँ.

8 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

शानदार अभिव्यक्ति

माधव said...

nice

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!! वाह!

my fast friends.com said...

nice..........very deep,

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 06 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

rahul.ranjan said...

धन्यवाद... उत्साहवर्धन के लिए....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

सुन्दर रचना !

नीरज गोस्वामी said...

शब्दों का अनुपम प्रयोग...अद्भुत रचना...वाह...
नीरज