Sunday, May 16, 2010

"न जाने क्यों?"



मेरी खुशियाँ, मेरे गम
हर पल, हर-दम
कभी ज्यादा, कभी कम
मेरे आँसू, मेरे सपने
कभी बेगाने, कभी अपने
न जाने क्यों….
मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो !
मेरी साँसें, मेरी धड़कन
कभी सुकून, कभी तड़पन
मेरी आरजू, मेरी जुस्तजू
मेरी कल्पना और हू-ब-हू
कभी ओझल कभी रु-ब-रु
न जाने क्यों….
मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो !
कभी प्यार, कभी तकरार
कभी दर्द, कभी करार
कभी हंसी, कभी खुशी
कभी खिजा, कभी बहार
कभी शीतल पुरवाई, कभी ठंडी फुहार
न जाने क्यों….
मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो !
कभी ख्वाबिदा, कभी पोशीदा
कभी मूक, कभी वाचाल
कभी रंग, कभी गुलाल
वंचक की तरह सताते हो
पास आ दूर हो जाते हो..
अकिंचन ही मन को भाते हो
न जाने क्यों…. मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो !

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