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स्वप्न सुंदरी

उड़ते बादल   ने     एक   चेहरा बुना मासूम , मोहक , मदमस्त कुछ सुना – कुछ अनसुना चेहरे की मुस्कुराहट देख पागल दिल ने   एक   गीत बुना हवा ने की छेड्खानी तेरी जुल्फों को बिखेरा माथे पर सरक आई एक लट और   मेरा देखना एक टक तेरा यूँ   हडबडा   जाना   आँचल का सर-सराना सुध बुध का खोना पलकों का बिछोना वो कमसिन सी   कली   महकी गली-गली कमाल सी लचक माधुर्य ज्यों मिश्री की लड़ी   वो यौवन वो जवानी अविरल बहता पानी मुँह फेर लेना बालों को झटक हाय ये अदा जानी पहचानी   हवा से बादल का उड़ जाना मध्ध्म होते-होते   उस   चेहरे का खो जाना सपने की टूटन , आंखो का खुल जाना नींद से जागना और   स्वप्न सुंदरी का खो जाना

सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया     न आदि न अंत अविरल अनंत सुसुप्त – जीवंत दुखांत-सुखांत सपनों की दुनिया .... छोटी सी टोकरी लाल पीले कपड़ों की कतरन कुछ खिलौने   एक    सन्दुक डेहरी पर रखी मुनिया सपनों की दुनिया एक    राजा   एक    रानी वो आँधी वो पानी एक भूल एक नादानी एक    छोटी सी गुड़िया सपनों की दुनिया हसी की निरंतरता गम की बारम्बारता सकुचाई लजाई  लाल जोड़े की कनिया सपनों की दुनिया कभी नून – कभी तेल एक    सिपाही   एक    जेल परचून की दुकान कंही   सुनार ,   कंही   बनिया सपनों की दुनिया अंधेरा – निशाचर रौद्र   कभी कातर इतराती- इठलाती लाल जोडे में दुल्हनिया मेरे सपनों की दुनिया 

रह-गुजर

अल्हड सा बचपन सावन का यौवन, पतझड़ की किलकारी फागुन की पिचकारी  वो नीम, वो झूला, कागज के कप, मिट्टी का चूल्हा एक बरसाती नांव वो सर्दियों में अलाव यौवन का दस्तक, बचपन की विदाई, तेरी पहली अंगड़ाई वो शाम हरजाई. तेरी तिरछी नज़र वो कच्ची उम्र भीड़ में तन्हाई पहले प्यार की परछाई. दिल बेकरार तेरा इंतजार मोहब्बत का इजहार और..तेरा इनकार शूल सी चुभन, मन में दहन बर्ताव अनजाना मेरा रूठना, तेरा मनाना.. स्वप्नों का पल्लवन मुस्कराहट का नमन दिल धीर-अधीर मैं, तुम, और नदी का तीर. जज्बातों की गिरह खयालातों की जिरह मन पे उकेरी इबारत ख्वाबों की ईमारत न अब वो पल हैं नाही पलछिन, न जाने कहाँ हो तुम मैं भी हूँ कहीं गुम... न तू, न मैं क्या जय, क्या पराजय. उन शब्दों की खनक ज्यों विशाल धनक.. काली घटा तेरी छटा, तम् घोर, इत-उत चहुँ ओर.. राह ताकती ऑंखें, तेरी धुंधली छवि, वो मासूम पल, मेरा आज, मेरा कल तेरी रुखी आवाज़ वो रूठे साज रिश्तों की दूरियां तेरी मेरी मजबूरियां बिन तेरे भोर एक ख़ामोशी का शोर, आँखों की गुफ्तगू और तेरी जुस्तजू. तन्हा सा...