सपनों की दुनिया न आदि न अंत अविरल अनंत सुसुप्त – जीवंत दुखांत-सुखांत सपनों की दुनिया .... छोटी सी टोकरी लाल पीले कपड़ों की कतरन कुछ खिलौने एक सन्दुक डेहरी पर रखी मुनिया सपनों की दुनिया एक राजा एक रानी वो आँधी वो पानी एक भूल एक नादानी एक छोटी सी गुड़िया सपनों की दुनिया हसी की निरंतरता गम की बारम्बारता सकुचाई लजाई लाल जोड़े की कनिया सपनों की दुनिया कभी नून – कभी तेल एक सिपाही एक जेल परचून की दुकान कंही सुनार , कंही बनिया सपनों की दुनिया अंधेरा – निशाचर रौद्र कभी कातर इतराती- इठलाती लाल जोडे में दुल्हनिया मेरे सपनों की दुनिया
कभी -कभी बाज़ार में यूँ भी हो जाता है, क़ीमत ठीक थी, जेब में इतने दाम न थे... ऐसे ही एक बार मैं तुमको हार आया था.........! .... गुलज़ार