मेरी खुशियाँ , मेरे गम हर पल , हर-दम कभी ज्यादा , कभी कम मेरे आँसू , मेरे सपने कभी बेगाने , कभी अपने न जाने क्यों …. मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो ! मेरी साँसें , मेरी धड़कन कभी सुकून , कभी तड़पन मेरी आरजू , मेरी जुस्तजू मेरी कल्पना और हू-ब-हू कभी ओझल कभी रु-ब-रु न जाने क्यों …. मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो ! कभी प्यार , कभी तकरार कभी दर्द , कभी करार कभी हंसी , कभी खुशी कभी खिजा , कभी बहार कभी शीतल पुरवाई , कभी ठंडी फुहार न जाने क्यों …. मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो ! कभी ख्वाबिदा , कभी पोशीदा कभी मूक , कभी वाचाल कभी रंग , कभी गुलाल वंचक की तरह सताते हो पास आ दूर हो जाते हो.. अकिंचन ही मन को भाते हो न जाने क्यों …. मेरी ज़िंदगी में तुम्ही-तुम हो !
कभी -कभी बाज़ार में यूँ भी हो जाता है, क़ीमत ठीक थी, जेब में इतने दाम न थे... ऐसे ही एक बार मैं तुमको हार आया था.........! .... गुलज़ार